2014 में दुनिया के सबसे ख़ूंख़ार आतंकवादी गुट दाइश ने जब दुनिया के सामने अब तक का आतंकवाद का सबसे भयानक चेहरा पेश किया और इराक़ के एक बड़े हिस्से पर क़ब्ज़ा कर लिया तो इसका मुक़ाबला करने के लिए इराक़ी स्वयं सेवी गुटों ने एकजुट होकर पीएमएफ़ का गठन किया।
दाइश के आतंकवादियों ने इराक़ी सेना को क़रीब अप्रासंगिक कर दिया था। इराक़ी सेना पूरी तरह से पतन की कगार पर पहुंच चुकी थी और इस अरब देश में पूरी तरह से अराजकता फैलने वाली थी।
15 जून 2014 को, इराक़ के वरिष्ठ शिया धर्मगुरु अयातुल्ला अली अल-सिस्तानी ने दाइश के ख़िलाफ़ जिहाद का फ़तवा जारी किया, जिसके बाद आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में सेना की मदद के लिए स्वयं सेवी गुटों को एकजुट और उनका पुनर्गठन किया गया।
इस ऐतिहासिक फ़तवे के बाद बड़ी संख्या में इराक़ी युवा हशदुश्शाबी के बैनर तले स्वयं सेवी गुटों से जुड़ने लगे। स्वयं सेवी बलों ने लड़ाई के मोर्चे पर इराक़ी सेना की मदद के साथ ही कई मोर्चों पर दाइश को पराजित किया।
हश्दुश्शाबी में शामिल स्वयं सेवी गुटों और इराक़ी सेना के संयुक्त प्रयासों के नतीजे में 2017 में दाइश के क़ब्ज़े वाले सभी इलाक़ों को आज़ाद करा लिया गया और इस तरह से सिर्फ़ तीन वर्षों में इस तथाकथित ख़िलाफ़त का ख़ात्मा कर दिया गया, जिसके लिए अमरीकी अधिकारियों ने भविष्यवाणी की थी कि 2030 तक दुनिया की कोई ताक़त दाइश को पराजित नहीं कर सकती।
दाइश के ख़िलाफ़ लड़ाई में हशदुश्शाबी की महत्वपूर्ण भूमिका के कारण, नवम्बर 2016 को इराक़ी संसद ने एक बिल पारित करके इसे एक सरकारी फ़ोर्स में बदल दिया और इसे वही अधिकार प्रदान किए जो इराक़ी सेना को हासिल हैं। हालांकि अमरीका ने इसके ख़िलाफ़ काफ़ी प्रोपैगंडा किया और इस पर साम्प्रदायिकता फैलाने के आरोप लगाए।
मार्च 2018 में तत्कालीन प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी ने एक आदेश जारी करके हश्दुश्शाबी को इराक़ी सेना के समान पद और वेतन दिए जाने की व्यवस्था की।
जुलाई 2019 में इराक़ी प्रधानमंत्री आदिल अब्दुल मेहदी ने हशदुश्शाबी के इराक़ी सेना में विलय का आदेश जारी किया और उसे सेना के समान अधिकार दिए जाने पर बल दिया।
इस समस्त प्रक्रिया के बाद भी अमरीका और उसके सहयोगी हशदुश्शाबी पर ईरानी प्रभाव में काम करने का आरोप लगा रहे हैं।
29 दिसम्बर को अमरीकी युद्धक विमानों और ड्रोन विमानों ने हश्दुश्शाबी की 45वीं और 46वीं बटालियनों पर बमबारी करके, जो कतायेब हिज़्बुल्लाह गुट से संबंधित हैं, 25 से ज़्यादा लड़ाकों को शहीद कर दिया था।
इसके बाद से इराक़ और अमरीका के बीच तनाव में वृद्धि देखने में आ रही है, अमरीका ने कतायेब हिज़्बुललाह पर ईरान के प्रभाव में काम करने का आरोप लगाते हुए अपने इस हमले को सही ठहराने की कोशिश की है।
पेंटागन ने एक बयान जारी करके कहा है कि इराक़ में अमरीकी सैनिकों पर हाल ही में हुए रॉकेट हमलों के जवाब में यह हमले किए गए हैं।
इराक़ी अधिकारियों और धार्मिक नेतृत्व ने अमरीका के इस हमले को देश की संप्रभुता पर हमला क़रार दिया है, जिसके बाद से इराक़ से अमरीकी सैनिकों को बाहर निकालने की मांग ज़ोर पकड़ने लगी है।